Project 75I: भारत की समुद्री ताकत को नई उड़ान? 🚀 चमकेगा Mazagon Dock Shipbuilders Share? दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं, Mazagon Dock Shipbuilders Share से जुड़े एक mega contract के बारे में। सोचिए ज़रा, अगर भारत के पास ऐसी submarines हों जो समंदर की गहराइयों में चुपचाप दुश्मनों की हर हरकत पर नजर रख…
Project 75I: भारत की समुद्री ताकत को नई उड़ान? 🚀 चमकेगा Mazagon Dock Shipbuilders Share?
दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं, Mazagon Dock Shipbuilders Share से जुड़े एक mega contract के बारे में। सोचिए ज़रा, अगर भारत के पास ऐसी submarines हों जो समंदर की गहराइयों में चुपचाप दुश्मनों की हर हरकत पर नजर रख सकें, बिना सतह पर आए हफ्तों तक अपना मिशन पूरा कर सकें और किसी को कानोंकान खबर भी न हो — क्या ऐसा मुमकिन है?
अब लगता है कि हां, बहुत जल्द ये मुमकिन होने वाला है, और इसकी वजह है Indian navy की आने वाली mega deal, जिसकी चर्चा पूरे defense sector में चल रही है। ये deal करीब ₹90,000 करोड़ रुपये से लेकर 1 ट्रिलियन रुपए की होने वाली है जिसके तहत 9 new advanced और stealth capable submarines बनाने की तैयारी चल रही है, जो सीधे तौर पर भारत की marine power को एक नया मुकाम देंगी।
Project 75I: भारत का Big Defense Mission
Project 75 India (P75I) – यह Indian navy की उस योजना का हिस्सा है जिसमें modern submarines का निर्माण indigenouslly तौर पर किया जाना है। इससे भारत को न केवल सुरक्षा में मजबूती मिलेगी, बल्कि defense manufacturing के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का नया दौर शुरू होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ये डील ₹90,000 करोड़ से लेकर ₹1 ट्रिलियन के बीच अनुमानित मूल्य वाले इस बड़े acquisition को Cabinet Committee on Security (CCS) से final approval का इंतज़ार है।
इस योजना में 6 जहाजों के लिए एक Initial contract की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक साल बाद तीन और submarines के orders देने का option भी शामिल है, जो 2020 की Defense Acquisition Process (DAP) के according है।
इस project में जो सबसे खास बात है, वो है AIP यानी Air Independent Propulsion तकनीक। ये तकनीक submarines को बिना सतह पर आए हफ्तों तक पानी के नीचे operate करने की ताकत देती है। यानी stealth operations और दुश्मन की पकड़ से पूरी तरह बाहर।
यह development भारत के submarine acquisition program में एक रणनीतिक मोड़ का संकेत देता है, जो संभवतः फ्रांस के साथ लंबे समय से चले आ रहे सहयोग से जर्मनी के साथ एक नई साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करता है।
Mazagon Dock और TKMS की साझेदारी — दमदार और भरोसेमंद
अब सवाल उठता है कि इतनी बड़ी और अहम डील किसे दी जाएगी?
इससे पहले फ्रांसीसी Naval group पूर्ववर्ती project 75 में प्रमुख भागीदार था, जिसके तहत 2006 से 2015 के बीच Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) द्वारा छह Kalvari class (Scorpene class का एक प्रकार) submarines का निर्माण किया गया था।
अब नई P-75 (I) यानि कि Project 75(India) पहल भारत की सरकारी स्वामित्व वाली Mazagon Dock Shipbuilders और जर्मनी की ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) के बीच सहयोग के माध्यम से implement होने की उम्मीद है। जर्मन फर्म के साथ प्रस्तावित सौदा वर्तमान में Kalvari class बेड़े के विस्तार की योजनाओं को सीधे प्रभावित कर सकता है।
ये कदम नई और अधिक advanced technology में निवेश करने के एक रणनीतिक निर्णय को रेखांकित करता है। ये P-75 (I) project के तहत जो submarines की acquisition होने वाली है उनमें बेहतर stealth विशेषताएँ होनी चाहिए और शुरू से ही एक proven AIP system से लैस होना आवश्यक है।
इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने प्राथमिकताओं में स्पष्ट बदलाव का संकेत देते हुए कहा कि project 75 के तहत Scorpene platfrom के लिए आगे के orders की उम्मीद नहीं है।
TKMS को submarines के design और technical support का अनुभव है। वहीँ MDL पहले ही कई सफल submarine projects को अंजाम दे चुका है। जब दोनों की ताकत मिलती है, तो उम्मीद की जा सकती है कि भारत को मिलेंगी दुनिया की सबसे आधुनिक और खतरनाक submarines.
क्या होंगी इन submarines की खासियतें?
अब बात करें इनके फीचर्स की तो ये submarines सिर्फ दिखने में खतरनाक नहीं होंगी, बल्कि technically रूप से भी top class होंगी:
Air Independent Propulsion system
Stealth design, जिससे radar पकड़ नहीं पाएंगे
Torpedo और missile launch की क्षमता
लंबी दूरी तक बिना वापस लौटे operate करने की ताकत
और सबसे बड़ी बात ये है की Indian maritime border की invisible security में इजाफा होगा।
Employment और Make in India को मिलेगा बढ़ावा
जब TKMS अपनी technology भारत को transfer करेगा और production का काम MDL करेगा, तो देश में हजारों engineer, technician और industrial workers को काम मिलेगा। अलग-अलग राज्यों में इससे जुड़े sector जैसे Electronics, Materials, Automation और Steel Industry को नई जान मिलेगी।
“Make in India” और “Aatmanirbhar Bharat” के लक्ष्य के लिए यह deal एक milestone साबित हो सकती है।
कब तक आ सकती है पहली पनडुब्बी?
Deal finalize होते ही TKMS भारत में training, technology transfer और co-production का काम शुरू करेगा। उम्मीद की जा रही है कि first submarine का trial 2031 तक हो सकता है और उसके बाद हर साल 1-2 submarines Indian navy के fleet में शामिल किया जाएगा।
इस तरह अगले 8-10 वर्षों में Indian navy को एक बिल्कुल नया और powerful submarine squad मिल जाएगा।
क्या बाकी देश भी लाइन में हैं?
शुरुआत में इस project में कई विदेशी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी। स्पेन की Navantia, फ्रांस की Naval Group और रूस की Rubin भी इस रेस में थीं। लेकिन अब लग रहा है कि जर्मन कंपनी TKMS अपनी भरोसेमंद technology और बेहतर delivery system की वजह से इस दौड़ में सबसे आगे निकल चुकी है।
भारत के maritime future की नींव तैयार
आज जब भारत एक global power बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब समुद्र में मजबूत उपस्थिति उसकी ज़रूरत बन गई है। 90,000 करोड़ की यह deal सिर्फ एक defense deal नहीं, बल्कि भारत के maritime future की नींव है।
ये submarines के आने से भारत को एक ऐसी ताकत मिलेगी, जो दुश्मनों को सोचने पर मजबूर कर देगी कि अगर वो कुछ भी गड़बड़ करेंगे, तो समंदर की गहराइयों से कौन उन्हें देख रहा है, इसका अंदाज़ा भी नहीं होगा।
Mazagon Dock Share के अंदर निवेशकों के लिए क्या है खास?
दोस्तों खबर ऐसी है कि ये डील इस साल के अंत तक फाइनल हो सकती है और अगर ये डील फाइनल हो जाती है तो Mazagon Dock Shipbuilders के order book में काफी बढ़िया इजाफा होगा।
और इससे investors को future revenue growth की बेहतरीन visibility मिलेगी, कम्पनी जैसे-जैसे अपने orders को execute करते जाएगी वैसे-वैसे order की value कंपनी के revenue में कन्वर्ट होते जाएगी।
कंपनी ने हाल ही में अपने q1 results को announce किए हैं –
June 2025 के quarter में mazagon dock shipbuilders की revenue सालाना आधार (Year on Year basis) पर 11.4% से बढ़कर ₹2625 करोड़ पर पहुंच गई।
बात करें कंपनी के net profit की – तो सालाना आधार (Year on Year basis) पर -35% से गिरकर ₹452 करोड़ पर आ गया।
Mazagon dock shipbuilders की EBIDTA -53% से गिरकर इस बार ₹302 करोड़ पर आ गया।
Mazagon dock shipbuilders की EBIDTA margin सालाना आधार पर 27.4% से गिरकर 11.4% पर आ गया।
Mazagon Dock Share Price performance;
Mazagon Dock Share के अंदर हाल ही में एक new record high बना है, जिसके बाद शेयर में profit booking देखने को मिल रही है।
कमजोर results के वजह से भी शेयर में गिरावट देखने को मिल रही है।
और दोस्तों ऐसी बात भी नहीं है कि सिर्फ इसी शेयर में गिरावट चल रही है, अभी पूरे defense sector में हीं गिरावट चल रही है, और दोस्तों अभी Defense sector में गिरावट क्यूं चल रही है? इसके ऊपर हमने एक detail article भी पोस्ट किया है, आप चाहें तो उस पोस्ट के माध्यम से detail में समझ सकते हैं।
Mazagon Dock Share Order book
अभी भी Mazagon dock की order book बढ़िया है जो कि लगभग 30 हजार करोड़ के आस-पास है। इसमें defenSe के साथ-साथ non defence के orders भी शामिल हैं।
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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। निवेश करने से पहले अपने financial advisor से सलाह जरूर लें।
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